Wednesday, April 27, 2011

adhura rishta

पूनम की किरणें धरती को , जब चाँद सा रौशन करती हैं ;
जब सर्द हवाएं गालों को , छू-छू कर गुजरा करती हैं ;
जब उम्मीदें छत पर मेरी , तनहा सी टहला करती हैं ;
जब दिल की धड़कन कानों में , रह -रह कर गूंजा करती हैं ;
तब एक अधूरे रिश्ते की , वो राहें मुझे बुलाती हैं ;
और उस बिछड़े रिश्ते की हर , यादें अक्सर याद आती हैं ;
क्यों टूटा वो रिश्ता मुझसे , क्यूँ टूटी वो उम्मीद वहीँ ;
क्यूँ दिल है अब बेआब बहुत , क्यूँ आती मुझको नींद नहीं ;
ये साँसें बहकी रहती हैं मौसम भी बहका रहता है ;
जब अक्सर मुझको ख्वाबों में , एक अक्स बुलाया करता है ;
तब एक अधूरे रिश्ते की , आवाजें मुझे बुलाती हैं ;
' और उस बिछड़े रिश्ते की हर यादें अक्स याद आती हैं ;
नछत्रों की भाषा में , इक नछत्र से मेरा नाता है ;
जिस शख्स का नाम भरी महफ़िल , लेने में दिल घबराता है ; अपना सब कुछ खोकर के भी , जाने क्या पा सा जाता हूँ ;
जब उसकी शर्मीली नजरों , के आगे मैं झुक जाता हूँ ;
तब एक अधूरे रिश्ते की , बातें हमको तड़पाती हैं ;
और उस बिछड़े रिश्ते की हर यादें अक्सर याद आती हैं

1 comment:

  1. वाह। बहुत ही सुन्दर। अधूरे रिश्ते को क्या बयां किया है। वाह।

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